समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान

समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान

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तू मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे… अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती

अभी उड़ने दो इन कबूतरों को जब हम आएंगे आसमान खुद ही खाली हो जायेगा

हमारी बराबरी करने जाओगे तो बिक जाओगे

कदर करनी है तो जीते जी करो अर्थी उठाते वक़्त तो नफरत करने वाले भी रो पड़ते हैं.......

जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए

अच्छी किताबे,और अच्छे लोग..! तुरंत समझ में नहीं आते, उन्हें पढ़ना पड़ता है..

तू मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे… अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती

अभी उड़ने दो इन कबूतरों को जब हम आएंगे आसमान खुद ही खाली हो जायेगा

हमारी बराबरी करने जाओगे तो बिक जाओगे

कदर करनी है तो जीते जी करो अर्थी उठाते वक़्त तो नफरत करने वाले भी रो पड़ते हैं.......

जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए

अच्छी किताबे,और अच्छे लोग..! तुरंत समझ में नहीं आते, उन्हें पढ़ना पड़ता है..