समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान

समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान

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रुठुंगा अगर तुजसे तो इस कदर रुठुंगा की ,, ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे

फ़र्क़ बहुत हे तेरे और मेरे में, तुमने उस्तादों से सीखा है, मैंने हलातो से सीखा है

शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते

समझा दो उन समझदारो को, की कातिलो की गली में भी दहशत हमारे ही नाम की है !!

रुठुंगा अगर तुजसे तो इस कदर रुठुंगा की ,, ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे

फ़र्क़ बहुत हे तेरे और मेरे में, तुमने उस्तादों से सीखा है, मैंने हलातो से सीखा है

शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते

समझा दो उन समझदारो को, की कातिलो की गली में भी दहशत हमारे ही नाम की है !!