अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।
अहसास ही बदल जाते हैं बस और कुछ नहीं होता, मोहब्बत और नफरत एक ही दिल से होती है।
ये तो ज़रूरी नहीं कि कुत्ता ही वफादार निकले, समय आने पर आपका वफादार भी कुत्ता निकल सकता है।
ज़िन्दगी के सफ़र में ऐसा अकसर होता है, मुश्किल फैसला ही हमेशा बेहतर होता है।
अगर झुकने से रिश्ता गहरा हो तो झुक जाओ, लेकिन अगर हर बार आपको ही झुकना पड़े तो रुक जाओ।
मरने वाले आदमी के लिए रोने वाले हजारों मिल जाएंगे, मगर जो आदमी जिन्दा है उसे समझने वाला कोई भी नही मिलेगा।
अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।
अहसास ही बदल जाते हैं बस और कुछ नहीं होता, मोहब्बत और नफरत एक ही दिल से होती है।
ये तो ज़रूरी नहीं कि कुत्ता ही वफादार निकले, समय आने पर आपका वफादार भी कुत्ता निकल सकता है।
ज़िन्दगी के सफ़र में ऐसा अकसर होता है, मुश्किल फैसला ही हमेशा बेहतर होता है।
अगर झुकने से रिश्ता गहरा हो तो झुक जाओ, लेकिन अगर हर बार आपको ही झुकना पड़े तो रुक जाओ।
मरने वाले आदमी के लिए रोने वाले हजारों मिल जाएंगे, मगर जो आदमी जिन्दा है उसे समझने वाला कोई भी नही मिलेगा।