Emotions में इतना ज्यादा बह जाना भी ठीक नहीं होता है, कि आप गलत का साथ देने लगें और सच से नजरें चुराने लगें.
जो लोग अन्दर से मर जाते है, अक्सर वही लोग दूसरो को जीना सिखाते है।
ये सागर भी तुम्हारी तरह बेवफा निकला, जिन्दा थे तब तैरने नहीं दिया और जब मर गए हैं तो डूबने भी नहीं देता।
जो इंसान खुद और खुद के सपने के बारे में नहीं सोचता, वो दरअसल सोचता ही नही हैं.
दुःख से पता नहीं क्यों लोग डरते हैं लोग जबकि हमारे जीवन की शुरुआत ही रोने से हुई है.
उसी से पूछ लो उसके इश्क की कीमत, हम तो बस उसके भरोसे पर बिक गए।
Emotions में इतना ज्यादा बह जाना भी ठीक नहीं होता है, कि आप गलत का साथ देने लगें और सच से नजरें चुराने लगें.
जो लोग अन्दर से मर जाते है, अक्सर वही लोग दूसरो को जीना सिखाते है।
ये सागर भी तुम्हारी तरह बेवफा निकला, जिन्दा थे तब तैरने नहीं दिया और जब मर गए हैं तो डूबने भी नहीं देता।
जो इंसान खुद और खुद के सपने के बारे में नहीं सोचता, वो दरअसल सोचता ही नही हैं.
दुःख से पता नहीं क्यों लोग डरते हैं लोग जबकि हमारे जीवन की शुरुआत ही रोने से हुई है.
उसी से पूछ लो उसके इश्क की कीमत, हम तो बस उसके भरोसे पर बिक गए।