में चुप हूँ कुछ वजह है जिस दिन बरस जाऊंगा उस दिन तरस भी नहीं खाऊंगा

में चुप हूँ कुछ वजह है जिस दिन बरस जाऊंगा उस दिन तरस भी नहीं खाऊंगा

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मुझे कमज़ोर समझने की गलती मत करना प्यार और वार वक़्त आने पे करुगा

सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है

जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं

बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को

ये तो सच है क़ि तुम्हे चाहने वाले बहुत होंगे पर मेरी भी ज़िद है कि मुझे सिर्फ तुम चाहो

हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है

मुझे कमज़ोर समझने की गलती मत करना प्यार और वार वक़्त आने पे करुगा

सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है

जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं

बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को

ये तो सच है क़ि तुम्हे चाहने वाले बहुत होंगे पर मेरी भी ज़िद है कि मुझे सिर्फ तुम चाहो

हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है