में चुप हूँ कुछ वजह है जिस दिन बरस जाऊंगा उस दिन तरस भी नहीं खाऊंगा

में चुप हूँ कुछ वजह है जिस दिन बरस जाऊंगा उस दिन तरस भी नहीं खाऊंगा

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जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे

कुछ देर की खामोशी है फिर कानो मैं शोर आएगा, तुम्हरा तोह सिर्फ वक़्त है हमारा दौर आएगा

मैं तोह पहले से ही बिगड़ा हुआ हु तुम जैसे मेरा क्या बिगाड़ लोगे

बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं, रातों से लड़ना पड़ता |

समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान

जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे

कुछ देर की खामोशी है फिर कानो मैं शोर आएगा, तुम्हरा तोह सिर्फ वक़्त है हमारा दौर आएगा

मैं तोह पहले से ही बिगड़ा हुआ हु तुम जैसे मेरा क्या बिगाड़ लोगे

बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं, रातों से लड़ना पड़ता |

समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान