दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

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बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए

जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ

दिल की ख़ामोशी पर मत जाओ, राख के नीचे आग दबी होती है ..

कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे

नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....

शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है

बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए

जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ

दिल की ख़ामोशी पर मत जाओ, राख के नीचे आग दबी होती है ..

कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे

नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....

शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है