तेरे बाद नज़र आती नहीं मुझे अब कोई मंज़िल, किसी और का हो जाना अब मेरे बस में ही नहीं ..
अब तो यह दिल भी आवारगी पर उतर आया कहता है. ले चल उनकी गलियो में वरना अपनी मौत का ज़िम्मेदार तू खुद होगा.
दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है ।
क्यों तुम मेरे ख्यालों में आकर चली जाती हो? अपनी जुल्फों को बिखराकर चली जाती हो. रग रग में उमड़ आता हैतूफान हुस्न का, तुम जो फूल सा मुस्कुराकर चली जाती हो.
कैसे करूं मैं साबित… कि तुम याद बहुत आते हो, एहसास तुम समझते नहीं और अदाएं हमें आती नहीं…
रात को जब चाँद सितारे चमकते हैं, हम हरदम फिर तेरी याद में तड़पते हैं, आप तो चले गए हो छोड़कर हम को, मगर हम मिलने को तरसते है..
तेरे बाद नज़र आती नहीं मुझे अब कोई मंज़िल, किसी और का हो जाना अब मेरे बस में ही नहीं ..
अब तो यह दिल भी आवारगी पर उतर आया कहता है. ले चल उनकी गलियो में वरना अपनी मौत का ज़िम्मेदार तू खुद होगा.
दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है ।
क्यों तुम मेरे ख्यालों में आकर चली जाती हो? अपनी जुल्फों को बिखराकर चली जाती हो. रग रग में उमड़ आता हैतूफान हुस्न का, तुम जो फूल सा मुस्कुराकर चली जाती हो.
कैसे करूं मैं साबित… कि तुम याद बहुत आते हो, एहसास तुम समझते नहीं और अदाएं हमें आती नहीं…
रात को जब चाँद सितारे चमकते हैं, हम हरदम फिर तेरी याद में तड़पते हैं, आप तो चले गए हो छोड़कर हम को, मगर हम मिलने को तरसते है..