सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं

सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं

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अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..

हद है यार.. प्यार भी हम ही करे, निभाए भी हम ही और छोड़ कर वो चला जाए तो रोये भी हम ही..

ज़हर का भी अपना हिसाब है, मरने के लिए थोड़ा सा और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है.!

टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है

इस दुनिया में अजनबी रहना ही ठीक है लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर

कभी कभी हम किसी के लिए उतना जरूरी भी नहीं होते जितना हम सोच लेते है .

अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..

हद है यार.. प्यार भी हम ही करे, निभाए भी हम ही और छोड़ कर वो चला जाए तो रोये भी हम ही..

ज़हर का भी अपना हिसाब है, मरने के लिए थोड़ा सा और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है.!

टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है

इस दुनिया में अजनबी रहना ही ठीक है लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर

कभी कभी हम किसी के लिए उतना जरूरी भी नहीं होते जितना हम सोच लेते है .