सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं

सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं

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जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा

जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते

ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए

सुना है आज उस की आँखों मे आसु आ गये, वो बच्चो को सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है

मैंने दोस्ती माँगी थी वो इश्क़ देकर बर्बाद कर गया

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......

जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा

जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते

ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए

सुना है आज उस की आँखों मे आसु आ गये, वो बच्चो को सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है

मैंने दोस्ती माँगी थी वो इश्क़ देकर बर्बाद कर गया

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......