गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई

गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई

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कुछ दूर हमारे साथ चलो, हम दिल की कहानी कह देंगे, समझे ना जिसे तुम आखो से, वो बात जुबानी कह देंगे ।

उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..

अगर आंसुओं की कीमत होती तो कल रात वाला तकिया अरबों का होता

कोई अपना सा क्या लगा एक बार, किस्मत ने तो बुरा ही मान लिया

कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.

कितनी आसानी से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियो से बोझ थे हम तुम्हारे उपर.

कुछ दूर हमारे साथ चलो, हम दिल की कहानी कह देंगे, समझे ना जिसे तुम आखो से, वो बात जुबानी कह देंगे ।

उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..

अगर आंसुओं की कीमत होती तो कल रात वाला तकिया अरबों का होता

कोई अपना सा क्या लगा एक बार, किस्मत ने तो बुरा ही मान लिया

कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.

कितनी आसानी से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियो से बोझ थे हम तुम्हारे उपर.