मेरी ख़ामोशी को कमजोरी ना समझ ऐ काफिर … गुमनाम समन्दर ही खौफ लाता है
क्रोध एक ऐसा श्राप हैं जो मनुष्य खुद को देता हैं…
सुना है तुम्हे मोहोबत का सोक नहीं है लेकिन बर्बाद तो तुम कमाल का करती हो.
"क्रोध में हो तो बोलने से पहले दस तक गिनो, अगर ज़्यादा क्रोध में तो सौ तक।"
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है.
बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना, कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !
मेरी ख़ामोशी को कमजोरी ना समझ ऐ काफिर … गुमनाम समन्दर ही खौफ लाता है
क्रोध एक ऐसा श्राप हैं जो मनुष्य खुद को देता हैं…
सुना है तुम्हे मोहोबत का सोक नहीं है लेकिन बर्बाद तो तुम कमाल का करती हो.
"क्रोध में हो तो बोलने से पहले दस तक गिनो, अगर ज़्यादा क्रोध में तो सौ तक।"
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है.
बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना, कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !