"क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ और पश्चाताप पर खत्म होता है |"
मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल छोटा करूँ… वो उतनी ही कर सकी वफ़ा जितनी उसकी औकात थी…
यदि आप सही हैं तो आपको गुस्सा होने की जरूरत नहीं हैं और यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्सा होने का कोई हक़ नही हैं…
वो मेरी न हुई तो ईसमेँ हैरत की कोई बात नहीँ, क्योँकि शेर से दिल लगाये बकरी की ईतनी औकात नही।
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।
"मूर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है, किंतु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है |"
"क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ और पश्चाताप पर खत्म होता है |"
मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल छोटा करूँ… वो उतनी ही कर सकी वफ़ा जितनी उसकी औकात थी…
यदि आप सही हैं तो आपको गुस्सा होने की जरूरत नहीं हैं और यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्सा होने का कोई हक़ नही हैं…
वो मेरी न हुई तो ईसमेँ हैरत की कोई बात नहीँ, क्योँकि शेर से दिल लगाये बकरी की ईतनी औकात नही।
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।
"मूर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है, किंतु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है |"