क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है.

क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है.

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एक क्रोधित व्यक्ति अपना मुंह खोल लेता है और आँख बंद कर लेता है.

आसमान में उड़ने वाले जरा ये खबर भी रख, जन्नत पहुँचने का रास्ता मिट्टी से ही गुजरता है।

गुस्से में बोला गया एक कठोर शब्द इतना जहरीला बन सकता हैं कि आपकी हजार प्यारी बातों को एक मिनट में नष्ट कर सकता हैं…

"क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है | अतः हमें सदैव शांत व स्थिरचित्त रहना चाहिए |"

इंगरसोल

क्रोध पर यदि काबू ना किया जाये, तो वह जिस चोट के कारण उत्पन्न हुआ उससे से कहीं ज्यादा हानि पहुंचा सकता है.

लुसिउस अन्नेईस सेनेसा

शहर भर मेँ एक ही पहचान है ‘हमारी’ सुर्ख आँखे, गुस्सैल चेहरा और नवाबी अदायेँ’!

एक क्रोधित व्यक्ति अपना मुंह खोल लेता है और आँख बंद कर लेता है.

आसमान में उड़ने वाले जरा ये खबर भी रख, जन्नत पहुँचने का रास्ता मिट्टी से ही गुजरता है।

गुस्से में बोला गया एक कठोर शब्द इतना जहरीला बन सकता हैं कि आपकी हजार प्यारी बातों को एक मिनट में नष्ट कर सकता हैं…

"क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है | अतः हमें सदैव शांत व स्थिरचित्त रहना चाहिए |"

इंगरसोल

क्रोध पर यदि काबू ना किया जाये, तो वह जिस चोट के कारण उत्पन्न हुआ उससे से कहीं ज्यादा हानि पहुंचा सकता है.

लुसिउस अन्नेईस सेनेसा

शहर भर मेँ एक ही पहचान है ‘हमारी’ सुर्ख आँखे, गुस्सैल चेहरा और नवाबी अदायेँ’!