आइना कोई ऐसा बना दे ऐ खुदा जो, इंसान का चेहरा नहीं किरदार दिखा दे!
जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।
वो पिला कर जाम लबों से अपनी मोहब्बत का, अब कहते हैं नशे की आदत अच्छी नहीं होती!!
उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!
कभी टूट कर बिखरो तो मेरे पास आ जाना, मुझे अपने जैसे लोग बहुत पसंद हैं
तमन्नाओं की महफिल तो हर कोई सजाता है.. मगर पूरी उसी की होती है यहां साहब..जो लिखाकर लाता है.
आइना कोई ऐसा बना दे ऐ खुदा जो, इंसान का चेहरा नहीं किरदार दिखा दे!
जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।
वो पिला कर जाम लबों से अपनी मोहब्बत का, अब कहते हैं नशे की आदत अच्छी नहीं होती!!
उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!
कभी टूट कर बिखरो तो मेरे पास आ जाना, मुझे अपने जैसे लोग बहुत पसंद हैं
तमन्नाओं की महफिल तो हर कोई सजाता है.. मगर पूरी उसी की होती है यहां साहब..जो लिखाकर लाता है.