अपने पसीने का आनंद उठाइए क्योंकि कठिन परिश्रम सफलता की गारंटी नहीं देता पर उसके बिना कोई चांस ही नहीं है.

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लोगों को भरपूर सम्मान दीजिये.... इसलिए नहीं कि, उनका अधिकार है... बल्कि इसलिए कि, आप में संस्कार है ...!

अभी से वो होना शुरू कीजिये जो आप भविष्य में होंगे

इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहना अच्छा है।

नम्रता से बोलना हर एक का आदर करना शुक्रिया अदा करना और माफ़ी माँगना ये चार गुण जिस व्यक्ति के पास है वो सबके क़रीब और सबके लिए खास है

मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।

सफल होने के बाद भी आप खुद को उस व्यक्ति से बड़ा ना समझे जिसके हाथों को पकड़ कर आपने सफलता की सीढ़ी चढ़ी

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इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहना अच्छा है।

नम्रता से बोलना हर एक का आदर करना शुक्रिया अदा करना और माफ़ी माँगना ये चार गुण जिस व्यक्ति के पास है वो सबके क़रीब और सबके लिए खास है

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