ना शाखों ने जगह दी ,, ना हवाओं ने बख्शा..! मैं हूँ टुटा हुआ पत्ता. आवारा ना बनता तो क्या करता
उसे ये कोन बतलाये, उसे ये कोन समझाए कि खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते है
उसको मालूम तो हैं मेरे हालातो के बारे मे, फिर खैरियत पूछकर मेरी मुश्किलें क्यों बढ़ाते हैं |
नुक्स निकालते है वो इस कदर हम मे, जैसे उन्हे खुदा चाहिए था और हम इंसान निकले ?
बहुत कुछ पाने वाले बहुत कुछ खोया करते हैं, इस दुनिया में हस्सने वाले सबसे ज़्यादा रोया करते हैं
बहुत याद आते हो तुम, दुआ करो मेरी यादाश्ति चली जाये
ना शाखों ने जगह दी ,, ना हवाओं ने बख्शा..! मैं हूँ टुटा हुआ पत्ता. आवारा ना बनता तो क्या करता
उसे ये कोन बतलाये, उसे ये कोन समझाए कि खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते है
उसको मालूम तो हैं मेरे हालातो के बारे मे, फिर खैरियत पूछकर मेरी मुश्किलें क्यों बढ़ाते हैं |
नुक्स निकालते है वो इस कदर हम मे, जैसे उन्हे खुदा चाहिए था और हम इंसान निकले ?
बहुत कुछ पाने वाले बहुत कुछ खोया करते हैं, इस दुनिया में हस्सने वाले सबसे ज़्यादा रोया करते हैं
बहुत याद आते हो तुम, दुआ करो मेरी यादाश्ति चली जाये