आज भी हारी हुयी बाजी खेलना पसंद है हमें क्युकी हम किस्मत से ज्यादा अपने आप पे भरोसा करते है

हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है

रहना है तो मेरा रहे वरना जिसका होना हो, हो ले अब कोई मगजमारी नहीं.

नहीं बदल सकते हम खुदको औरो का हीसाब से, एक हिसाब मुझे भी दिया है, खुदा न अपना हिसाब से ..

ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो

ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए

ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं

पल पल रंग बदलती है दुनिया और लोग पूछते है होली कब है |

मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है

शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा

किस घुमान मैं हो मोहतरमा भुला दिया हमने तुझे