ये तो इश्क़ का कोई लोकतंत्र नहीं होता, वरना रिश्वत देके तुझे अपना बना लेते

उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता

रुकते तोह सफर रह जाता, चलते तोह हमसफ़र रह जाता

मुझे ढूंढने की कोशिश अब न किया कर, तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली

ला तेरे पैरों पर मरहम लगा दू, कुछ चोट तोह तुझे भी आई होगी मेरे दिल को ठोकर मारने में

बोहुत भीड़ है मोहब्बत के इस शेहेर में, एक बार जो बिछड़ा वापस नहीं मिलता

दुश्मनो से मोहब्बत होने लगी मुझको, जैसे जैसे अपनों को आज़माते चले गए

प्यार की लड़ाई में, जिसके दिल में अधिक प्यार रहता है वो हार जाता है