कितने कम लफ्जों मे जिंदगी को बयान करूँ, लो तुम्हारा नाम लेकर किस्सा तमाम करूँ

कुछ इस तरह से….नाराज हैं वो हमसे, जैसे उन्हें, किसी और ने…मना लिया हो..!

काश ये दिल बेजान होता, ना किसी के आने से धडकता ना किसी के जाने पर तडपता

तुम ही वजह मेरे खालीपन की.. और.. तुम्ही गूंजते हो मुझमें हरदम !

कोई भी दीवारें मुझे तुमसे मिलने से ना रोक पाती, अगर तू मेरे साथ होती तो

प्यार की गहरायी की सीमा तब पता चलती है, जब बिछुड़ने का समय होता है

वो नकाब लगा कर खुद को इश्क से महफूज समझते रहे; नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है

जाते वक्त बहोत गुरूर से कहा था उसने.... "तुम जैसे हजार मिलेंगे" मैंने मुस्कुरा कर कहा.... " मुझ जैसे की ही तलाश क्यों

धड़कनों को भी रास्ता दे दीजिये हुजूर, आप तो पूरे दिल पर कब्जा किये बैठे है.

अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है

कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

सुना है तुम ज़िद्दी बहुत हो, मुझे भी अपनी जिद्द बना लो !!