हम रोज़ उदास होते हैं और रात गुज़र जाती है एक दिन रात उदास होगी और हम गुज़र जाएंगे

ना अपने पास हूं ना तेरे साथ हूं, बहुत दिनों से मैं यूं ही उदास हूं !

नसीहत अच्छी देती है दुनिया अगर दर्द किसी ग़ैर का हो

हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था

जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा

मै तुमको भूल तो जाऊं मगर छोटी सी उलझन है.. सुना है... दिल से धड़कन की जुदाई मौत होती है ..!

अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो

गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं

जब दो लोगो के बीच में तीसरा इंसान आ जाता है तो दूरियां अपने आप बढ़ जाती है

सारी दुनिया के रूठ जाने से मुझे कोई दुख नहीं, बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है

क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये