मुकुदर की लिखावट का एक ऐसा भी कायदा हो देर से किस्मत खुलने वालो का दुगना फायदा हो
सिर्फ जहर ही मौत नही देता कुछ लोगो की बाते भी काफी होती है
रिश्ता रखो तो सच्चा नही तो अलविदा ही अच्छा
कड़ी मेहनत और खुदा की रहमत इंसान को गिरने नही देती...
चिंता उतनी करो की काम हो जाये..इतनी नही की ज़िन्दगी तमाम हो जाये
अपने जीवन की तुलना किसी के साथ नहीं करनी चाहिए "सूर्य" और "चद्रमा" के बीच कोई तुलना नहीं हैं जब जिसका वक़्त आता है तभी वो चमकता है
सिर्फ उतना ही विन्रम बनो जितना जरूरी हो वेवजह की विनम्रता दुसरो के
पहचान बनानी है तो
जिन रिश्तों में आपकी मौजूदगी का कोई मतलब नही हो वहाँ से
फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है
आप चाहकर भी लोगो की अपने प्रति लोगो की धारणा नही बदल सकते इसलिए
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा