बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!
यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
चैन से गुज़र रही थी ज़िन्दगी, और फिर तुम मिल गए!
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!
यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
चैन से गुज़र रही थी ज़िन्दगी, और फिर तुम मिल गए!