जब तेरी याद आती है ना आँखे तोह मान जाती है पर यह कम्बख्त दिल रो पड़ता है
याद करोगे एक दिन मुझे ये सोच कर की क्यों नहीं कदर की मैंने उसके प्यार की
वो भी जिन्दा है, मैं भी जिन्दा हूँ… क़त्ल सिर्फ इश्क़ का हुआ है
भुला दूंगा तुझे ज़रा सब्र तो कर, तेरी तरह मतलबी बनने में थोड़ा वक़्त तो लगेगा ही।
तेरी-मेरी राहें तो कभी एक थी ही नहीं, फिर शिकवा कैसा और शिकायत कैसी
हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है
जब तेरी याद आती है ना आँखे तोह मान जाती है पर यह कम्बख्त दिल रो पड़ता है
याद करोगे एक दिन मुझे ये सोच कर की क्यों नहीं कदर की मैंने उसके प्यार की
वो भी जिन्दा है, मैं भी जिन्दा हूँ… क़त्ल सिर्फ इश्क़ का हुआ है
भुला दूंगा तुझे ज़रा सब्र तो कर, तेरी तरह मतलबी बनने में थोड़ा वक़्त तो लगेगा ही।
तेरी-मेरी राहें तो कभी एक थी ही नहीं, फिर शिकवा कैसा और शिकायत कैसी
हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है