अब अगर तुम जाने ही लगे हो तो पलट कर मत देखना, *क्योकि मौत की सजा लिखने के बाद कलम तोड़ दी जाती है*
"न कर मोहब्बत ये तेरे बस की बात नहीं, वो दिल मोहब्बत करते हैं जो तेरे पास नहीं!"
आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
मिल सके आसानी से उसकी खवाहिश किसे है, ज़िद्द तो उसकी है जो मुक्कदर में लिखा ही नहीं है
बेवजह इंतज़ार
अब अगर तुम जाने ही लगे हो तो पलट कर मत देखना, *क्योकि मौत की सजा लिखने के बाद कलम तोड़ दी जाती है*
"न कर मोहब्बत ये तेरे बस की बात नहीं, वो दिल मोहब्बत करते हैं जो तेरे पास नहीं!"
आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
मिल सके आसानी से उसकी खवाहिश किसे है, ज़िद्द तो उसकी है जो मुक्कदर में लिखा ही नहीं है
बेवजह इंतज़ार