तेरी-मेरी राहें तो कभी एक थी ही नहीं, फिर शिकवा कैसा और शिकायत कैसी
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.
शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था
बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!
हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है
तेरी-मेरी राहें तो कभी एक थी ही नहीं, फिर शिकवा कैसा और शिकायत कैसी
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.
शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था
बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!
हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है