उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी

उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी

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शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था

बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!

आज़ाद कर दिया हे हमने भी उस पंछी को …,जो हमारी दिल की कैद में रहने को तोहीन समजता था ..।

मत करो उसके मैसेज का इन्तजार जो ऑनलाइन तो है पर किसी और के लिया..

तेरी-मेरी राहें तो कभी एक थी ही नहीं, फिर शिकवा कैसा और शिकायत कैसी

मुझे फरक नहीं पड़ता,,,,अब क़समें खाओ या जहर..!!

शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था

बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!

आज़ाद कर दिया हे हमने भी उस पंछी को …,जो हमारी दिल की कैद में रहने को तोहीन समजता था ..।

मत करो उसके मैसेज का इन्तजार जो ऑनलाइन तो है पर किसी और के लिया..

तेरी-मेरी राहें तो कभी एक थी ही नहीं, फिर शिकवा कैसा और शिकायत कैसी

मुझे फरक नहीं पड़ता,,,,अब क़समें खाओ या जहर..!!