पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
अगर किसी दिन तुम्हें रोना आए तो कॉल जरूर कर लेना, हंसाने की गारंटी तो नहीं लेता पर तेरे साथ जरूर रहूंगा
ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है..तो मेरा लहू लेले....यू कहानिया अधूरी न लिखा कर।
क्या खूब मजबूरियां थी मेरी भी अपनी ख़ुशी को छोड़ दिया ” उसे ” खुश देखने के लिए
ना चाँद अपना था और ना तू अपना था ...!! काश दिल भी मान लेता की सब सपना था
बेवजह इंतज़ार
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
अगर किसी दिन तुम्हें रोना आए तो कॉल जरूर कर लेना, हंसाने की गारंटी तो नहीं लेता पर तेरे साथ जरूर रहूंगा
ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है..तो मेरा लहू लेले....यू कहानिया अधूरी न लिखा कर।
क्या खूब मजबूरियां थी मेरी भी अपनी ख़ुशी को छोड़ दिया ” उसे ” खुश देखने के लिए
ना चाँद अपना था और ना तू अपना था ...!! काश दिल भी मान लेता की सब सपना था
बेवजह इंतज़ार