पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है
हम दोनों बराबर जिद्दी रहे हमेशा ना उसने गुस्सा कम किया ना मैंने प्यार
कर लो नजर अंदाज अपने हिसाब से.. जब हम करेगे तो बेहिसाब करेगे..!
शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते
तुम अपनी अच्छाई में मशहूर रहो, हम बुरे है हमसे दूर रहो
अब मैं अपना वक़्त बरदाद नहीं करता जो चले गए है उन्हें याद नहीं करता
पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है
हम दोनों बराबर जिद्दी रहे हमेशा ना उसने गुस्सा कम किया ना मैंने प्यार
कर लो नजर अंदाज अपने हिसाब से.. जब हम करेगे तो बेहिसाब करेगे..!
शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते
तुम अपनी अच्छाई में मशहूर रहो, हम बुरे है हमसे दूर रहो
अब मैं अपना वक़्त बरदाद नहीं करता जो चले गए है उन्हें याद नहीं करता