में तो पहले से बदनाम हु तुम शरीफ लोग मेरा क्या उखाड़ लोगे
मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है
रहना है तो मेरा रहे वरना जिसका होना हो, हो ले अब कोई मगजमारी नहीं.
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है
में तो पहले से बदनाम हु तुम शरीफ लोग मेरा क्या उखाड़ लोगे
मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है
रहना है तो मेरा रहे वरना जिसका होना हो, हो ले अब कोई मगजमारी नहीं.
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है