गुरूर मे इंसान को कभी इंसान नहीं देखता जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही माकन नहीं देखता
जो सुधर जाये वह हम नहीं और हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नहीं
हम बाते हालत के हिसाब से करते है
तू इतना भी बेहतरीन नही, जिस के लिऐ मै खुद को गिरा दूं !
जिंदगी में भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता है
गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है
गुरूर मे इंसान को कभी इंसान नहीं देखता जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही माकन नहीं देखता
जो सुधर जाये वह हम नहीं और हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नहीं
हम बाते हालत के हिसाब से करते है
तू इतना भी बेहतरीन नही, जिस के लिऐ मै खुद को गिरा दूं !
जिंदगी में भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता है
गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है