तू मोहब्बत थी इसलिए तुझे भाव दिया, वरना इग्नोर करने में मैंने पीएचडी की है
मेरे बारे में इतना मत सोचना , दिल में आता हु , समज में नही
समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
हमारी बराबरी करने जाओगे तो बिक जाओगे
जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है
तू मोहब्बत थी इसलिए तुझे भाव दिया, वरना इग्नोर करने में मैंने पीएचडी की है
मेरे बारे में इतना मत सोचना , दिल में आता हु , समज में नही
समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
हमारी बराबरी करने जाओगे तो बिक जाओगे
जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है