हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!

हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!

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मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है

गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है

अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना

बेटा झूले पे झूल लेकिन अपनी औकात मत भूल

हमारे जिँदगी की कहानी कूछ ऐसी है जिसमे Hero भी हम और Villain भी हम

ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए

मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है

गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है

अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना

बेटा झूले पे झूल लेकिन अपनी औकात मत भूल

हमारे जिँदगी की कहानी कूछ ऐसी है जिसमे Hero भी हम और Villain भी हम

ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए