जैसा दोगे वैसा ही पाओगे.. फ़िर चाहे इज्ज़त हो या धोखा..!!

जैसा दोगे वैसा ही पाओगे.. फ़िर चाहे इज्ज़त हो या धोखा..!!

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काम ऐसा करो की नाम हो जाए या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए

दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही मज़ेदार है बस निभाने का दम होना चाहिए

दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो , वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं

फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती

हम जैसे सिरफिरे ही इतिहास रचते हैं !समझदार तो केवल इतिहास पढ़ते हैं !!

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं

काम ऐसा करो की नाम हो जाए या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए

दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही मज़ेदार है बस निभाने का दम होना चाहिए

दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो , वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं

फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती

हम जैसे सिरफिरे ही इतिहास रचते हैं !समझदार तो केवल इतिहास पढ़ते हैं !!

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं