तुझे क्या लगता है तेरे जाने से गम होगा, नहीं मेरी जान बस एक कॉन्टैक्ट कम होगा
अब मैं अपना वक़्त बरदाद नहीं करता जो चले गए है उन्हें याद नहीं करता
सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं
जो मेरा होता है उस पर किसी का हक़ तो क्या नज़र तक बर्दाश्त नहीं करती मै
मतलबी नहीं मै बस दूर हो गया हूँ, उन लोगो से जिन्हे मेरी कदर नही..
हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही
तुझे क्या लगता है तेरे जाने से गम होगा, नहीं मेरी जान बस एक कॉन्टैक्ट कम होगा
अब मैं अपना वक़्त बरदाद नहीं करता जो चले गए है उन्हें याद नहीं करता
सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं
जो मेरा होता है उस पर किसी का हक़ तो क्या नज़र तक बर्दाश्त नहीं करती मै
मतलबी नहीं मै बस दूर हो गया हूँ, उन लोगो से जिन्हे मेरी कदर नही..
हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही