जब मैं अपने जीवन में सफल हुआ तो मुझे अपने गुरू की वो फटकार याद आई, पढ़ाई का काम पूरा न होने पर उनकी हल्की सी मार याद आई.

जब मैं अपने जीवन में सफल हुआ तो मुझे अपने गुरू की वो फटकार याद आई, पढ़ाई का काम पूरा न होने पर उनकी हल्की सी मार याद आई.

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बच्चों को स्कूल अच्छा नहीं लगता है परन्तु बच्चों के जीवन को स्कूल ही अच्छा बनाता हैं.

एक माँ-बाप में एक स्कूल, एक अध्यापक, एक रक्षक और वो सारी चीजें छुपी होती है जो एक बच्चे की जिंदगी को बेहतर बनाने में मदत करती हैं.

स्कूल में पाठ पहले पढ़ाया जाता है और फिर परीक्षा ली जाती है जबकि जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सीखने को मिलता हैं.

स्कूल के दिनों से ही कॉलेज जाने की बेसब्री रहती हैं क्योंकि जब मन होगा पढूँगा, जब मन होगा क्लास करूँगा और पूरी तरह आजाद रहूँगा.

कॉलेज ही एक छात्र के भविष्य को तय करता हैं कि वह उन 3-4 सालों में क्या करता हैं.

स्कूल तो ज्ञान का एक झरना है, जहाँ कुछ विद्यार्थी अपनी प्यास बुझाते हैं, कुछ एक दो घूँट पीते है और कुछ सिर्फ कुल्ला करते हैं

बच्चों को स्कूल अच्छा नहीं लगता है परन्तु बच्चों के जीवन को स्कूल ही अच्छा बनाता हैं.

एक माँ-बाप में एक स्कूल, एक अध्यापक, एक रक्षक और वो सारी चीजें छुपी होती है जो एक बच्चे की जिंदगी को बेहतर बनाने में मदत करती हैं.

स्कूल में पाठ पहले पढ़ाया जाता है और फिर परीक्षा ली जाती है जबकि जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सीखने को मिलता हैं.

स्कूल के दिनों से ही कॉलेज जाने की बेसब्री रहती हैं क्योंकि जब मन होगा पढूँगा, जब मन होगा क्लास करूँगा और पूरी तरह आजाद रहूँगा.

कॉलेज ही एक छात्र के भविष्य को तय करता हैं कि वह उन 3-4 सालों में क्या करता हैं.

स्कूल तो ज्ञान का एक झरना है, जहाँ कुछ विद्यार्थी अपनी प्यास बुझाते हैं, कुछ एक दो घूँट पीते है और कुछ सिर्फ कुल्ला करते हैं