रात के अंधेरे मे तो हर कोई किसी को याद कर लेता है सुबह उठते ही जिसकी याद आए मोहब्बत उसको कहते है
कोई भी दीवारें मुझे तुमसे मिलने से ना रोक पाती, अगर तू मेरे साथ होती तो
वो ज़िंदगी ही क्या जिसमे मोहब्बत नही, वो मोहबत ही क्या जिसमे यादें नही, वो यादें क्या जिसमे तुम नही, और वो तुम ही क्या जिसके साथ हम नही!!
मेरी आत्मकथा.... सिर्फ तुम्हारी कहानी है....
ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए, मुझे बस तेरी एक झलक चाहिए
उस शाम तुमने मुड़कर मुझे देखा जब, यूँ लगा जैसे हर दुआ कुबूल हो गयी
रात के अंधेरे मे तो हर कोई किसी को याद कर लेता है सुबह उठते ही जिसकी याद आए मोहब्बत उसको कहते है
कोई भी दीवारें मुझे तुमसे मिलने से ना रोक पाती, अगर तू मेरे साथ होती तो
वो ज़िंदगी ही क्या जिसमे मोहब्बत नही, वो मोहबत ही क्या जिसमे यादें नही, वो यादें क्या जिसमे तुम नही, और वो तुम ही क्या जिसके साथ हम नही!!
मेरी आत्मकथा.... सिर्फ तुम्हारी कहानी है....
ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए, मुझे बस तेरी एक झलक चाहिए
उस शाम तुमने मुड़कर मुझे देखा जब, यूँ लगा जैसे हर दुआ कुबूल हो गयी