न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
अच्छा हुआ जो तुमने हमें तोड़कर रख दिया, घमंड था मुझे बहुत की तुम सिर्फ मेरे हो
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
दिमाग कहता है मारा जायेगा लेकिन दिल कहता है देखा जाएगा
न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
अच्छा हुआ जो तुमने हमें तोड़कर रख दिया, घमंड था मुझे बहुत की तुम सिर्फ मेरे हो
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
दिमाग कहता है मारा जायेगा लेकिन दिल कहता है देखा जाएगा