शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी
धोखा बहुत मिल गया अब मौके की तलाश है
कुछ को हकीकत कुछ को ख्वाब करना है, बहुत से लोग हैं जिनका हिसाब करना है
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
मेरे जीने का तरीक़ा ज़माने से अलग है मैं इशारों पे नहीं ज़िद पर जीता हूँ
आज कर लिया खुदसे ये वादा नहीं चाहेंगे किसीको उस्सकी औक़ात सी ज़्यादा.
शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी
धोखा बहुत मिल गया अब मौके की तलाश है
कुछ को हकीकत कुछ को ख्वाब करना है, बहुत से लोग हैं जिनका हिसाब करना है
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
मेरे जीने का तरीक़ा ज़माने से अलग है मैं इशारों पे नहीं ज़िद पर जीता हूँ
आज कर लिया खुदसे ये वादा नहीं चाहेंगे किसीको उस्सकी औक़ात सी ज़्यादा.