तुम सिर्फ मेरे हो अब इससे प्यार समझो या क़ब्ज़ा

तुम सिर्फ मेरे हो अब इससे प्यार समझो या क़ब्ज़ा

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वक्त का ख़ास होना जरूरी नहीं है ख़ास के लिए वक्त होना जरूरी है

नाराज़ है तो नाराज़ ही रहने दो किसीके पैरों में गिरकर जिना हमें नहीं आता

बेटा झूले पे झूल लेकिन अपनी औकात मत भूल

हम बाते हालत के हिसाब से करते है

शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है

जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं, मै खुद को नही देखता औरो की नजर से..!!

वक्त का ख़ास होना जरूरी नहीं है ख़ास के लिए वक्त होना जरूरी है

नाराज़ है तो नाराज़ ही रहने दो किसीके पैरों में गिरकर जिना हमें नहीं आता

बेटा झूले पे झूल लेकिन अपनी औकात मत भूल

हम बाते हालत के हिसाब से करते है

शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है

जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं, मै खुद को नही देखता औरो की नजर से..!!