तुने भी वही किया जो सब करते हैं, पास आया.. सपना दिखाया.. अपना बनाया.. और फिर बिना कसुर बीच रास्ते में ही छोड़ गए । ❤?❤
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!
हम शिकवा करें क्या किसी से, यहाँ हर ओर बेवफाई है। उसे धोखा दिया किसी और ने, उसकी भी सजा हमने पाई है।।
जीते जी मौत से रूबरू होना है तो किसी बेवफा से मोहब्बत कर लो
हमने उन पर आँखे बंद करके विश्वास क्या किया, हम अंधे हैं उन्होंने यह महसूस भी करवा दिया। ??
तुने भी वही किया जो सब करते हैं, पास आया.. सपना दिखाया.. अपना बनाया.. और फिर बिना कसुर बीच रास्ते में ही छोड़ गए । ❤?❤
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!
हम शिकवा करें क्या किसी से, यहाँ हर ओर बेवफाई है। उसे धोखा दिया किसी और ने, उसकी भी सजा हमने पाई है।।
जीते जी मौत से रूबरू होना है तो किसी बेवफा से मोहब्बत कर लो
हमने उन पर आँखे बंद करके विश्वास क्या किया, हम अंधे हैं उन्होंने यह महसूस भी करवा दिया। ??