खुद को मैंने उसमें, मैं तो नहीं मिला कहीं, मिला तो बस धोखा, जिससे उठ गया भरोसा, प्यार पर से मेरा..!!

खुद को मैंने उसमें, मैं तो नहीं मिला कहीं, मिला तो बस धोखा, जिससे उठ गया भरोसा, प्यार पर से मेरा..!!

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कोई था क्या नशा तेरी आँखों के बराबर? कोई होगा क्या नशा तेरे जाने के बाद? सब ठीक तो था, बेवफाई करनी क्या जरुरी थी? छोडिए अब उनका जिक्र, हम फिर कोई मयखाना पी जाएंगे ।।

~ धोखा ~ मतलब निकल जाने के बाद सौगात में जो मिल जाता है उसे धोखा कहते हैं।

तुम खास थे इसलिए लड़े तुमसे, पराये होते तो मुस्कुरा कर जाने देते।

कुछ लोग इतने गरीब होते है कि, देने के लिए कुछ नहीं होता तो धोखा ही दे देते है!

धोखा करके किसी के साथ वफा की उम्मीद करते हैं कुछ लोग बुरा करके अपने साथ अच्छा होने की दुआ करते हैं!

जब हम गलत लोगों से उम्मीद पाल लेते हैं, तब हम खुद को खुद धोखा देते हैं.

कोई था क्या नशा तेरी आँखों के बराबर? कोई होगा क्या नशा तेरे जाने के बाद? सब ठीक तो था, बेवफाई करनी क्या जरुरी थी? छोडिए अब उनका जिक्र, हम फिर कोई मयखाना पी जाएंगे ।।

~ धोखा ~ मतलब निकल जाने के बाद सौगात में जो मिल जाता है उसे धोखा कहते हैं।

तुम खास थे इसलिए लड़े तुमसे, पराये होते तो मुस्कुरा कर जाने देते।

कुछ लोग इतने गरीब होते है कि, देने के लिए कुछ नहीं होता तो धोखा ही दे देते है!

धोखा करके किसी के साथ वफा की उम्मीद करते हैं कुछ लोग बुरा करके अपने साथ अच्छा होने की दुआ करते हैं!

जब हम गलत लोगों से उम्मीद पाल लेते हैं, तब हम खुद को खुद धोखा देते हैं.