जो एक बार धोखा दे चुका हो, उससे फिर धोखा खाना महामूर्खता है.
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
“धोखे” की “फितरत” है,,, “धोखा” ही “खाने” की….!!!
हमसे प्यार करने का खुद को मौका तो दे दो, चलो मत करो प्यार मुझसे हमेशा के लिए, पर सिर्फ थोड़ी देर प्यार करके धोखा ही दे दो।
गलती और धोखा में फर्क होता है आप जितनी जल्दी समझ जाओ उतना ही अच्छा है। गलतियां माफ की जा सकती है धोखा नहीं ।।
एक ही सिक्के के दो पहलू होते है। सिक्का कब पलट जाए, कहा नहीं जा सकता!
जो एक बार धोखा दे चुका हो, उससे फिर धोखा खाना महामूर्खता है.
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
“धोखे” की “फितरत” है,,, “धोखा” ही “खाने” की….!!!
हमसे प्यार करने का खुद को मौका तो दे दो, चलो मत करो प्यार मुझसे हमेशा के लिए, पर सिर्फ थोड़ी देर प्यार करके धोखा ही दे दो।
गलती और धोखा में फर्क होता है आप जितनी जल्दी समझ जाओ उतना ही अच्छा है। गलतियां माफ की जा सकती है धोखा नहीं ।।
एक ही सिक्के के दो पहलू होते है। सिक्का कब पलट जाए, कहा नहीं जा सकता!