हम तो आईना हैं और आईना ही रहेंगे, फ़िक्र वो करे जिनकी शक्लें ख़राब है।
अपने फ़ायदे के लिए दूसरे का नुकसान कभी नहीं करे
वैसे इंसान बनें जिस तरह के इंसान को आप पसंद करते हैं.
ज़िन्दगी बीत जाएगी चार दिन में इसे अपने में नहीं जिओ बल्कि अपनों के साथ जियो।
भावनाओं में बहकर किसी के सामने अपनी कमजोरियाँ को बता देना सबसे बड़ी मुर्खता है.
रिश्ते बरकरार रखने की सिर्फ एक ही शर्त है , भावना देखें , संभावना नहीं !!
हम तो आईना हैं और आईना ही रहेंगे, फ़िक्र वो करे जिनकी शक्लें ख़राब है।
अपने फ़ायदे के लिए दूसरे का नुकसान कभी नहीं करे
वैसे इंसान बनें जिस तरह के इंसान को आप पसंद करते हैं.
ज़िन्दगी बीत जाएगी चार दिन में इसे अपने में नहीं जिओ बल्कि अपनों के साथ जियो।
भावनाओं में बहकर किसी के सामने अपनी कमजोरियाँ को बता देना सबसे बड़ी मुर्खता है.
रिश्ते बरकरार रखने की सिर्फ एक ही शर्त है , भावना देखें , संभावना नहीं !!