लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.

लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.

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मैं जानता हूं कहां तक उड़ान है उनकी, मेरे ही हाथ से निकले हुए परिंदे है

अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना

मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है

जैसा दोगे वैसा ही पाओगे.. फ़िर चाहे इज्ज़त हो या धोखा..!!

तुझे क्या लगता है तेरे जाने से गम होगा, नहीं मेरी जान बस एक कॉन्टैक्ट कम होगा

दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है

मैं जानता हूं कहां तक उड़ान है उनकी, मेरे ही हाथ से निकले हुए परिंदे है

अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना

मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है

जैसा दोगे वैसा ही पाओगे.. फ़िर चाहे इज्ज़त हो या धोखा..!!

तुझे क्या लगता है तेरे जाने से गम होगा, नहीं मेरी जान बस एक कॉन्टैक्ट कम होगा

दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है