जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं

जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं

Share:

More Like This

काम ऐसा करो की नाम हो जाए या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए

दुनिया क्या सोचेगी ये मै कभी नहीं सोचता

किनारा न मिले तो कोई बात नहीं दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं है |

तेरे बाद किसी को प्यार से ना देखा हमने हमें इश्क का शौक है आवारगी का नहीं

सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है

रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .

काम ऐसा करो की नाम हो जाए या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए

दुनिया क्या सोचेगी ये मै कभी नहीं सोचता

किनारा न मिले तो कोई बात नहीं दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं है |

तेरे बाद किसी को प्यार से ना देखा हमने हमें इश्क का शौक है आवारगी का नहीं

सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है

रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .