धोखा बहुत मिल गया अब मौके की तलाश है

धोखा बहुत मिल गया अब मौके की तलाश है

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गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई

कुछ लोग मुझे गलत समझते हैं तो मुझे बुरा नहीं लगता, क्योंकि वह मुझे उतना ही समझते हैं जितनी उन्हें समझ है

हमारा नाम इतना भी कमज़ोर नहीं जो 2/4 कुत्तों के भोकने से बदनाम हो जाये

हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं

बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं

जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे

गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई

कुछ लोग मुझे गलत समझते हैं तो मुझे बुरा नहीं लगता, क्योंकि वह मुझे उतना ही समझते हैं जितनी उन्हें समझ है

हमारा नाम इतना भी कमज़ोर नहीं जो 2/4 कुत्तों के भोकने से बदनाम हो जाये

हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं

बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं

जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे