तू मोहब्बत थी इसलिए तुझे भाव दिया, वरना इग्नोर करने में मैंने पीएचडी की है
गुस्से के तेज़ लोग दिल के साफ़ होते हैं
माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं
नाम की दोस्ती काम की यारी दूसरों की तरह ये आदत नहीं हमारी
हमारे बीच अब कोई ताल्लुकात नही रहा बाकी, तुम्हारी मर्जी अब जो चाहे सोच सकते हो.......!!
जैसी DP वैसा मैं !!
तू मोहब्बत थी इसलिए तुझे भाव दिया, वरना इग्नोर करने में मैंने पीएचडी की है
गुस्से के तेज़ लोग दिल के साफ़ होते हैं
माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं
नाम की दोस्ती काम की यारी दूसरों की तरह ये आदत नहीं हमारी
हमारे बीच अब कोई ताल्लुकात नही रहा बाकी, तुम्हारी मर्जी अब जो चाहे सोच सकते हो.......!!
जैसी DP वैसा मैं !!