आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..

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जैसे तुम सोचते हो वैसे हम है नहीं और जैसे हम है वैसा तुम सोच भी नहीं सकते

आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..

अच्छा हुआ जो तुमने हमें तोड़कर रख दिया, घमंड था मुझे बहुत की तुम सिर्फ मेरे हो

ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो

तुम अपनी अच्छाई में मशहूर रहो, हम बुरे है हमसे दूर रहो

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

जैसे तुम सोचते हो वैसे हम है नहीं और जैसे हम है वैसा तुम सोच भी नहीं सकते

आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..

अच्छा हुआ जो तुमने हमें तोड़कर रख दिया, घमंड था मुझे बहुत की तुम सिर्फ मेरे हो

ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो

तुम अपनी अच्छाई में मशहूर रहो, हम बुरे है हमसे दूर रहो

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥