अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
दिल की ख़ामोशी पर मत जाओ, राख के नीचे आग दबी होती है ..
तू इतना भी बेहतरीन नही, जिस के लिऐ मै खुद को गिरा दूं !
झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .
हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती
अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
दिल की ख़ामोशी पर मत जाओ, राख के नीचे आग दबी होती है ..
तू इतना भी बेहतरीन नही, जिस के लिऐ मै खुद को गिरा दूं !
झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .
हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती