आज लफ्जों को मैने शाम की चाय पे बुलाया है. बन गयी बात तो ग़ज़ल भी हो सकती है.
किस हक से तुझे चाय पर बुलाऊं तुंम मेरे होने का कभी दावा तो करो.
बेताब सा रहने की आदत सी पड़ गई, दिल में उनके प्यार की खुशबू बिखर गई, आँखों से गुजरे थे वो एक ख्वाब की तरह, उनकी हसीं सूरत मेरे दिल में उतर गई। GOOD MORNING
किसी को इतना भी मत चाहो कि इस चाह मे तुम खुद को ही भूल जाओ। सुप्रभात
इतना गुमान मत रखो गोरे रंग का हम दूध से ज़ादा चाय के दीवाने हैं।
जिंदगी के हर छोटी छोटी चीजों मे समाधान ढूँढिए, और खुश रहना सीखिये। सुप्रभात
आज लफ्जों को मैने शाम की चाय पे बुलाया है. बन गयी बात तो ग़ज़ल भी हो सकती है.
किस हक से तुझे चाय पर बुलाऊं तुंम मेरे होने का कभी दावा तो करो.
बेताब सा रहने की आदत सी पड़ गई, दिल में उनके प्यार की खुशबू बिखर गई, आँखों से गुजरे थे वो एक ख्वाब की तरह, उनकी हसीं सूरत मेरे दिल में उतर गई। GOOD MORNING
किसी को इतना भी मत चाहो कि इस चाह मे तुम खुद को ही भूल जाओ। सुप्रभात
इतना गुमान मत रखो गोरे रंग का हम दूध से ज़ादा चाय के दीवाने हैं।
जिंदगी के हर छोटी छोटी चीजों मे समाधान ढूँढिए, और खुश रहना सीखिये। सुप्रभात