सुन बे खजूर वक़्त की बात है आज तेरा है कल मेरा होगा और जब मेरा होगा तोह सोच तेरा क्या होगा
खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो
हमारे बीच अब कोई ताल्लुकात नही रहा बाकी, तुम्हारी मर्जी अब जो चाहे सोच सकते हो.......!!
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
पलटकर जवाब देना गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदे भूल जाते है।
दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही मज़ेदार है बस निभाने का दम होना चाहिए
सुन बे खजूर वक़्त की बात है आज तेरा है कल मेरा होगा और जब मेरा होगा तोह सोच तेरा क्या होगा
खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो
हमारे बीच अब कोई ताल्लुकात नही रहा बाकी, तुम्हारी मर्जी अब जो चाहे सोच सकते हो.......!!
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
पलटकर जवाब देना गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदे भूल जाते है।
दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही मज़ेदार है बस निभाने का दम होना चाहिए