सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान
तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं
सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
जो मेरा होता है उस पर किसी का हक़ तो क्या नज़र तक बर्दाश्त नहीं करती मै
सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान
तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं
सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
जो मेरा होता है उस पर किसी का हक़ तो क्या नज़र तक बर्दाश्त नहीं करती मै