हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

Share:

More Like This

जैसे तुम सोचते हो वैसे हम है नहीं और जैसे हम है वैसा तुम सोच भी नहीं सकते

वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !

मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना.. जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी

जैसी DP वैसा मैं !!

इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं

शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा

जैसे तुम सोचते हो वैसे हम है नहीं और जैसे हम है वैसा तुम सोच भी नहीं सकते

वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !

मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना.. जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी

जैसी DP वैसा मैं !!

इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं

शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा