अभी उड़ने दो इन कबूतरों को जब हम आएंगे आसमान खुद ही खाली हो जायेगा
किस घुमान मैं हो मोहतरमा भुला दिया हमने तुझे
जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
तुम्हारी अकड़ में कुछ इस तरह से तोडूंगा सच कहता हूँ कहीं का नही छोडूंगा
औकात की बात मत कर ऐ दोस्त तेरी बंदूक से ज़ादा लोग हमारे नाम से डरते है
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
अभी उड़ने दो इन कबूतरों को जब हम आएंगे आसमान खुद ही खाली हो जायेगा
किस घुमान मैं हो मोहतरमा भुला दिया हमने तुझे
जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
तुम्हारी अकड़ में कुछ इस तरह से तोडूंगा सच कहता हूँ कहीं का नही छोडूंगा
औकात की बात मत कर ऐ दोस्त तेरी बंदूक से ज़ादा लोग हमारे नाम से डरते है
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं