बेटा प्यार से झुका सकता है हथियार से नहीं धोखे से मार सकता है वार से नहीं
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो
नहीं चाहिए जो मेरी किस्मत में नहीं भीख मांग कर जीना मेरी फितरत मे नहीं
बेटा प्यार से झुका सकता है हथियार से नहीं धोखे से मार सकता है वार से नहीं
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो
नहीं चाहिए जो मेरी किस्मत में नहीं भीख मांग कर जीना मेरी फितरत मे नहीं