हमारे बीच अब कोई ताल्लुकात नही रहा बाकी, तुम्हारी मर्जी अब जो चाहे सोच सकते हो.......!!

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क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!

झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है

ऐटिटूड तो बच्चे दिखाते है हम तो लोगो को उनकी औकात दिखाते है

मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

ये तो सच है क़ि तुम्हे चाहने वाले बहुत होंगे पर मेरी भी ज़िद है कि मुझे सिर्फ तुम चाहो

क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!

झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है

ऐटिटूड तो बच्चे दिखाते है हम तो लोगो को उनकी औकात दिखाते है

मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

ये तो सच है क़ि तुम्हे चाहने वाले बहुत होंगे पर मेरी भी ज़िद है कि मुझे सिर्फ तुम चाहो