हमारे बीच अब कोई ताल्लुकात नही रहा बाकी, तुम्हारी मर्जी अब जो चाहे सोच सकते हो.......!!

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मैं क्या हूँ ये सिर्फ में जानता हूँ बाकी दुनिया तो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती है

ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं

औकात की बात न करो अगर दिखा दी मेने तो वजूद मिट जायेगा तुम्हारा

अगर आपका आसमान वाले से मजबूत रिश्ता है, तो आपका जमीन वाले कुछ नही बिगाड़ सकतें हैं...

रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..

मैं क्या हूँ ये सिर्फ में जानता हूँ बाकी दुनिया तो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती है

ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं

औकात की बात न करो अगर दिखा दी मेने तो वजूद मिट जायेगा तुम्हारा

अगर आपका आसमान वाले से मजबूत रिश्ता है, तो आपका जमीन वाले कुछ नही बिगाड़ सकतें हैं...

रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..