अपनी ज़िन्दगी का एक अलग उसूल है, दोस्त की खातिर मुझे कांटे भी कुबूल है,

अपनी ज़िन्दगी का एक अलग उसूल है, दोस्त की खातिर मुझे कांटे भी कुबूल है,

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मित्र वो होता है जो आपको जाने और आपको उसी रूप में चाहे

कौन होता है दोस्त? दोस्त वो जो बिन बुलाये आये, बेवजह सर खाए, जेब खाली करवाए, कभी सताए, कभी रुलाये, मगर हमेशा साथ निभाए

जो सबका मित्र होता है वो किसी का मित्र नहीं होता है

कुछ खोये बिना हमने पाया है, कुछ मांगे बिना हमें मिला है, नाज़ है हमें अपनी तक़दीर पर जिसने आप जैसे दोस्त से मिलाया है

खुदा ने मुझे वफादार दोस्तों से नवाज़ा है याद मैं ना करूँ, तो कोशिश वो भी नहीं करते

हमने अमीरो से दोस्ती नहीं की दोस्तों से अमीर हुए हैं

मित्र वो होता है जो आपको जाने और आपको उसी रूप में चाहे

कौन होता है दोस्त? दोस्त वो जो बिन बुलाये आये, बेवजह सर खाए, जेब खाली करवाए, कभी सताए, कभी रुलाये, मगर हमेशा साथ निभाए

जो सबका मित्र होता है वो किसी का मित्र नहीं होता है

कुछ खोये बिना हमने पाया है, कुछ मांगे बिना हमें मिला है, नाज़ है हमें अपनी तक़दीर पर जिसने आप जैसे दोस्त से मिलाया है

खुदा ने मुझे वफादार दोस्तों से नवाज़ा है याद मैं ना करूँ, तो कोशिश वो भी नहीं करते

हमने अमीरो से दोस्ती नहीं की दोस्तों से अमीर हुए हैं