जिंदगी ने जख्म बहुत दिए, लेकिन हरेक को सिल लेता हूं। डार्लिंग तुम आलू उबालो, मैं मटर छील लेता हूं

जिंदगी ने जख्म बहुत दिए, लेकिन हरेक को सिल लेता हूं। डार्लिंग तुम आलू उबालो, मैं मटर छील लेता हूं

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इंसान हो तो सच्चे रहो बाकी,,, झूठे तो बर्तन भी होते है ?

किस किस का नाम लें, अपनी बरबादी मेँ; बहुत लोग आये थे दुआयेँ देने शादी मेँ !

*हर किसी को सफ़ाई मत दीजिये* *आप इंसान हैं, डिटर्जेंट नहीं...*

कुछ दोस्त पकोड़े जैसे होते हैं थोड़ा सा ध्यान ना दो तो जल जाते हैं

दर्द को भी आधार कार्ड से जोड़ दो जनाब, जिन्हे मिल गया हो, उन्हे दोबारा ना मिले.

आदमी कभी भी इतना झूठा नहीं होता अगर औरतें इतने सवाल न करती

इंसान हो तो सच्चे रहो बाकी,,, झूठे तो बर्तन भी होते है ?

किस किस का नाम लें, अपनी बरबादी मेँ; बहुत लोग आये थे दुआयेँ देने शादी मेँ !

*हर किसी को सफ़ाई मत दीजिये* *आप इंसान हैं, डिटर्जेंट नहीं...*

कुछ दोस्त पकोड़े जैसे होते हैं थोड़ा सा ध्यान ना दो तो जल जाते हैं

दर्द को भी आधार कार्ड से जोड़ दो जनाब, जिन्हे मिल गया हो, उन्हे दोबारा ना मिले.

आदमी कभी भी इतना झूठा नहीं होता अगर औरतें इतने सवाल न करती