जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.
इतने दर्द के बाद भी मुस्कुरा रहा हूँ ए ज़िंदगी देख तुझे कैसे हरा रहा हूँ मैं
निकलता है हर रोज़ 'सूरज', ये बताने के लिए.. कि उजाले बांट देने से उजाले कम नही होते..
कैलेंडर हमेशा तारीख को बदलता है। पर एक दिन ऐसी तारीख भी आती है कि जो कैलेंडर को ही बदल देती है। इसलिए सब्र रखो, वक़्त हर किसी का आता है।।"
वक़्त से लड़कर जो अपना नसीब बदल दे, इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे,
जो आपकी सही बातों का भी गलत मतलब निकालते है उनको सफाई देने में अपना वक़्त बर्बाद ना करे
जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.
इतने दर्द के बाद भी मुस्कुरा रहा हूँ ए ज़िंदगी देख तुझे कैसे हरा रहा हूँ मैं
निकलता है हर रोज़ 'सूरज', ये बताने के लिए.. कि उजाले बांट देने से उजाले कम नही होते..
कैलेंडर हमेशा तारीख को बदलता है। पर एक दिन ऐसी तारीख भी आती है कि जो कैलेंडर को ही बदल देती है। इसलिए सब्र रखो, वक़्त हर किसी का आता है।।"
वक़्त से लड़कर जो अपना नसीब बदल दे, इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे,
जो आपकी सही बातों का भी गलत मतलब निकालते है उनको सफाई देने में अपना वक़्त बर्बाद ना करे