नाराजगी कभी वहाँ मत रखिये...जहाँ आपको बताना पड़े आप नाराज हो
कोई अगर आप पे आँखे बंद करके भरोशा करता है तो उसे कभी ये एहसास मत दिलाना की वो अंधा है
मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही पर मिलता जरूर है..
यहां हर किसी को दरारों में झांकने की आदत है दरवाजा खोल दो तो कोई पूछने भी नही आयेगा
कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो
अच्छे के साथ बुरा भी उसके अच्छे के लिए ही होता है..
नाराजगी कभी वहाँ मत रखिये...जहाँ आपको बताना पड़े आप नाराज हो
कोई अगर आप पे आँखे बंद करके भरोशा करता है तो उसे कभी ये एहसास मत दिलाना की वो अंधा है
मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही पर मिलता जरूर है..
यहां हर किसी को दरारों में झांकने की आदत है दरवाजा खोल दो तो कोई पूछने भी नही आयेगा
कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो
अच्छे के साथ बुरा भी उसके अच्छे के लिए ही होता है..