रूठी पत्नी, लुप्त संपत्ति और हाथ से निकली भूमि वापस मिल सकती है, लेकिन मनुष्य जीवन पुनः नहीं मिल सकता, अतः दान-धर्म कर हमें अपना जीवन सफल बनाना चाहिए.
ब्राह्मण, गुरु, अग्नि, कुंवारी कन्या, बालक, और वृद्धों को पेरो से नहीं छूना चाहिए. ये सभी आदरणीय है. हमें इन्हें आदर-सम्मान देना चाहिए.
शब्द यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
खुद मालिक बनने की कोशिश जरूर करना क्योंकि आपका बॉस आपको अच्छी से अच्छी सैलरी देकर भी नौकर बना के रखेगा
कोई भी हमें सुख या दुख नही दे सकता , बल्कि हमारे सोचने का तरीका ही हमारे सुख व दुख का कारण होता है।✨
गलतियों से न सीखना ही एकमात्र गलती होती है
रूठी पत्नी, लुप्त संपत्ति और हाथ से निकली भूमि वापस मिल सकती है, लेकिन मनुष्य जीवन पुनः नहीं मिल सकता, अतः दान-धर्म कर हमें अपना जीवन सफल बनाना चाहिए.
ब्राह्मण, गुरु, अग्नि, कुंवारी कन्या, बालक, और वृद्धों को पेरो से नहीं छूना चाहिए. ये सभी आदरणीय है. हमें इन्हें आदर-सम्मान देना चाहिए.
शब्द यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
खुद मालिक बनने की कोशिश जरूर करना क्योंकि आपका बॉस आपको अच्छी से अच्छी सैलरी देकर भी नौकर बना के रखेगा
कोई भी हमें सुख या दुख नही दे सकता , बल्कि हमारे सोचने का तरीका ही हमारे सुख व दुख का कारण होता है।✨
गलतियों से न सीखना ही एकमात्र गलती होती है