प्यार निभाना आना चाहिए हो तो सबको जाता है
बोलना और प्रतिक्रिया करना जरूरी है लेकिन संयम और सभ्यता का दामन नहीं छूटना चाहिये..!!
तन की जाने मन की जाने जाने चित्त की चोरी उस मालिक से क्या छुपावे जिसके हाथ है सब की डोर
क्रोध, गुस्सा, नफरत ये सब Slow poison हैं... इन्हें पीते हम खुद हैं और सोचते हैं मरेगा कोई दूसरा!
घमंड ना करो अपने रूप और रुपए का मोर को उसके पंखों का भोज ऊँचा उड़ने नही देता
भाग्य पुरुषार्थी के पीछे चलता है।
प्यार निभाना आना चाहिए हो तो सबको जाता है
बोलना और प्रतिक्रिया करना जरूरी है लेकिन संयम और सभ्यता का दामन नहीं छूटना चाहिये..!!
तन की जाने मन की जाने जाने चित्त की चोरी उस मालिक से क्या छुपावे जिसके हाथ है सब की डोर
क्रोध, गुस्सा, नफरत ये सब Slow poison हैं... इन्हें पीते हम खुद हैं और सोचते हैं मरेगा कोई दूसरा!
घमंड ना करो अपने रूप और रुपए का मोर को उसके पंखों का भोज ऊँचा उड़ने नही देता
भाग्य पुरुषार्थी के पीछे चलता है।